हरपाल का हठयोग! घुटनों के बल गंगाजल लेने हरिद्वार पहुंचा कांवड़िया, 2400 किमी चलकर पशुपतिनाथ में करेंगे जलाभिषेक
कांवड़िए हरपाल नाथ रामराज मेरठ से घुटनों के बल गंगा जल लेने हरिद्वार पहुंचे. वे नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर में जलाभिषेक करेंगे.![]()
हरिद्वार: 30 जुलाई से कांवड़ मेले की विधिवत शुरुआत होगी, लेकिन उससे पहले ही बड़ी संख्या में कांवड़िए गंगा जल लेने हरिद्वार पहुंच रहे हैं. भगवान शिव में आस्था रखने वाले कांवड़ियों की भक्ति के अलग-अलग रंग भी देखने को मिल रहे हैं. मेरठ के रहने वाले 53 वर्षीय हरपाल नाथ रामराज घुटनों के बल कांवड़ लेकर हरिद्वार पहुंचे, जिसकी हर तरफ चर्चा की जा रही है.
हरपाल नाथ हरिद्वार से गंगाजल लेकर नेपाल पहुंचेंगे और उनकी मनोकामना, नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर में जलाभिषेक के बाद ही पूरी होगी. हालांकि उनकी कोई खास मनोकामना तो नहीं है लेकिन वो भगवान शिव के परम भक्त हैं और उन्हीं को प्रसन्न करने के लिए कठिन कांवड़ यात्रा पर निकले हैं. गंगाजल लेकर वो हरिद्वार से रवाना हो गए हैं.
दरअसल, सावन का कांवड़ मेला है और इसमें कोई खड़ी कांवड़ लेकर जा रहा है तो कोई लेटी कांवड़ लेकर जा रहा है. कोई मटकों में सैकड़ों लीटर जल भरकर जा रहा है. इन सबके बीच एक अनोखी कांवड़ भी हरिद्वार पहुंची, जिसे एक 53 वर्षीय व्यक्ति घुटनों के बल चलकर लेकर जा रहा है. यह व्यक्ति है हरपाल नाथ रामराज जो मेरठ का रहने वाले हैं और ये हरिद्वार से गंगाजल लेकर पशुपतिनाथ मंदिर (नेपाल) तक घुटनों के बल ही गंगाजल लेकर जाएगा.
करीब 2400 किलोमीटर की ये यात्रा हरपाल 411 दिन में पूरी करेंगे और यह उनकी तीसरी कांवड़ यात्रा है. इससे पहले वह हरिद्वार से सोनभद्र तक की 1800 किलोमीटर की यात्रा भी कर चुके हैं. कांवड़ में हरपाल खुद घुटनों से चल रहे हैं और एक ट्राली अपने से बांध रखी है जिसमें उनका गंगाजल और अन्य आवश्यक सामान रखा है.
हरपाल नाथ राम राज का कहना है कि, यह उनकी तीसरी यात्रा है और वह हरिद्वार से गंगाजल लेकर पशुपतिनाथ मंदिर नेपाल तक जाएंगे, जहां भगवान भोलेनाथ का इस गंगाजल से अभिषेक करेंगे. इस दौरान वह मुजफ्फरनगर और उज्जैन होते हुए पशुपति नाथ मंदिर नेपाल तक पहुंचेंगे. इस दौरान वो करीब 2400 किलोमीटर की यात्रा करेंगे और इसमें उनका 411 दिन लगेंगे. इससे पहले वे 1800 किलोमीटर की यात्रा हरिद्वार से सोनभद्र की कर चुके हैं और यह उनकी तीसरी यात्रा है, हालांकि यह कठिन यात्रा कर रहे हैं. मगर इस यात्रा के लिए उन्होंने कोई कामना नहीं की है. उनकी कोई इच्छा नहीं, बस वह भगवान शिव का मां गंगाजल से अभिषेक करने के लिए ऐसी कठिन और अनोखी यात्रा कर रहे हैं.
