रिस्पाना नदी केस में नया मोड़, प्रभावित लोगों को मिली राहत!
सुप्रीम कोर्ट ने देहरादून की रिस्पाना नदी से जुड़े अतिक्रमण मामले में फिलहाल राहत दी है। अदालत ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के उस आदेश पर अस्थायी रोक लगा दी है, जिसमें नदी के किनारे बने लगभग 20 अतिक्रमणों को हटाने के निर्देश दिए गए थे।
कोर्ट ने साफ तौर पर कहा है कि यह रोक स्थायी नहीं है। यह फैसला केवल मामले की दोबारा और सही तरीके से समीक्षा के लिए लिया गया है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार को निर्देश दिया है कि वह इस पूरे मामले को फिर से NGT के सामने रखे और वहां अपना पक्ष विस्तार से प्रस्तुत करे।
इस आदेश के बाद प्रभावित लोगों को फिलहाल राहत मिली है, क्योंकि अभी उनके घर या निर्माण नहीं हटाए जाएंगे। वहीं प्रशासन को भी अब कानून के तहत आगे की प्रक्रिया पूरी करने का मौका मिलेगा।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पर्यावरण संरक्षण बेहद जरूरी है, लेकिन किसी भी तरह की कार्रवाई करते समय कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना और मानवीय पहलुओं को ध्यान में रखना भी उतना ही आवश्यक है।
यह मामला देहरादून की रिस्पाना नदी से जुड़ा है, जहां लंबे समय से नदी किनारे अतिक्रमण और पर्यावरण संरक्षण को लेकर विवाद चल रहा है। अब इस मामले में आगे का फैसला NGT में दोबारा सुनवाई के बाद ही तय होगा।
