*मानवीय पहल: दून पुलिस ने 1 माह से बिछड़े मूक-बधिर बालक को परिजनों से मिलाया, मानवाधिकारों के संरक्षण की पेश की मिसाल*
- देहरादून : एक ओर जहाँ अक्सर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठते हैं, वहीं उत्तराखंड की ‘मित्र पुलिस’ ने अपनी मानवीय संवेदनाओं से एक बार फिर जनता का दिल जीत लिया है। देहरादून के थाना त्यूणी क्षेत्र में पुलिस ने मानसिक रूप से अस्वस्थ और मूक-बधिर किशोर को सुरक्षित रेस्क्यू कर उसे उसके परिवार तक पहुँचाया है। यह मामला न केवल पुलिस की सतर्कता को दर्शाता है बल्कि एक बेसहारा बालक के जीवन और सुरक्षा के अधिकार के प्रति पुलिस की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करता है।
बाजार में बदहवास मिला था किशोर
जानकारी के अनुसार, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) देहरादून के निर्देशों पर पूरे जनपद में सत्यापन और चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के दौरान 16 फरवरी को थाना त्यूणी पुलिस टीम को बाज़ार में एक 15-16 वर्षीय बालक अत्यंत बदहवास और डरी हुई अवस्था में मिला। बालक मूक-बधिर होने के कारण अपना नाम, पता या परिजनों की जानकारी देने में पूरी तरह असमर्थ था।
मानवीय संवेदनाओं के साथ की गई त्वरित कार्यवाही
बालक की असहाय स्थिति को देखते हुए पुलिस टीम ने उसे सुरक्षा की दृष्टि से थाने पहुँचाया। थाना प्रभारी के नेतृत्व में पुलिस ने हार नहीं मानी और बालक के अधिकारों के प्रति सजग रहते हुए आधुनिक सूचना तंत्र का सहारा लिया:
डिजिटल पहुंच: बालक की तस्वीर को सोशल मीडिया और उत्तराखंड पुलिस के विभिन्न व्हाट्सएप ग्रुप्स पर प्रसारित किया गया।
अंतर-जनपदीय समन्वय: उत्तरकाशी और आसपास के जनपदों के थानों से गुमशुदगी की रिपोर्टों का मिलान किया गया।
एक महीने से भटक रहा था बालक
कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस को सफलता मिली और बालक की पहचान ग्राम मोड़ा, थाना मोरी (जनपद उत्तरकाशी) के निवासी के रूप में हुई। परिजनों ने बताया कि बालक मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ नहीं है और करीब एक माह पूर्व घर से बिना बताए कहीं चला गया था। परिजन उसे ढूंढने के लिए दर-दर भटक रहे थे, लेकिन सफलता नहीं मिल रही थी।
परिजनों की आँखों में आए खुशी के आँसू
दिनांक 17 फरवरी 2026 को जब बालक को उसके माता-पिता के सुपुर्द किया गया, तो पूरे थाने में भावुक कर देने वाला दृश्य था। परिजनों ने उत्तराखंड पुलिस का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पुलिस ने उनके ‘बुझते हुए चिराग’ को फिर से रोशन कर दिया है।
*मानवाधिकार विशेष टिप्पणी:
यह घटना दर्शाती है कि समाज के सबसे कमजोर वर्ग—जैसे मानसिक रूप से अस्वस्थ और दिव्यांग बच्चे—के प्रति पुलिस का संवेदनशील रवैया उनके मौलिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए कितना आवश्यक है। त्यूणी पुलिस की यह कार्यवाही सराहनीय है।*
