ट्रंप का बड़ा फैसला: अमेरिका में सभी आयातों पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लागू, सुप्रीम कोर्ट के झटके के बाद ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति पर नया दांव

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वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी विवादित ‘अमेरिका फर्स्ट’ (America First) आर्थिक नीति को आगे बढ़ाते हुए सभी आयातों पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की है। यह फैसला तब आया है जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के पिछले कई मनमाने शुल्कों को रद्द कर उनकी आर्थिक रणनीति को बड़ा झटका दिया था।

 

24 फरवरी से लागू होगा नया आदेश

 

व्हाइट हाउस द्वारा जारी फैक्टशीट के अनुसार, यह नया शुल्क 24 फरवरी से प्रभावी होगा और अगले 150 दिनों तक लागू रहेगा। हालांकि, कुछ क्षेत्रों को इससे राहत दी गई है:

 

फार्मा सेक्टर: जो वर्तमान में अलग जांच के दायरे में हैं।

 

USMCA समझौता: अमेरिका-मेक्सिको-कनाडा समझौते के तहत आने वाले सामानों को छूट दी गई है।

 

दिलचस्प बात यह है कि जिन व्यापारिक साझेदारों ने पहले ट्रंप प्रशासन के साथ विशेष टैरिफ डील की थी, उन्हें भी अब इस 10% शुल्क का सामना करना होगा, चाहे पहले के समझौते में दरें कुछ भी रही हों।

 

भारत के साथ व्यापार सौदे पर ट्रंप का बयान: “अब हुआ है फेयर डील”

 

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद, राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया कि भारत-अमेरिका व्यापार सौदे पर इसका कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने सोशल मीडिया और प्रेस वार्ता के दौरान कहा:

 

“भारत के साथ हमारा सौदा बरकरार है। अब यह एक निष्पक्ष (Fair) सौदा है। पहले हम शुल्क चुका रहे थे, लेकिन अब स्थिति बदल गई है। अब वे टैरिफ देंगे और हम नहीं। हमने बस चीजों को थोड़ा घुमा दिया है (We did a little flip)। भारत के साथ डील जारी है, बस हम इसे नए तरीके से लागू करेंगे।”

 

क्या है इस कदम के पीछे की कूटनीति?

 

विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद ट्रंप ने अपनी साख बचाने के लिए यह ‘यूनिफॉर्म टैरिफ’ कार्ड खेला है। जहां एक ओर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे आर्थिक दबाव की राजनीति माना जा रहा है, वहीं व्हाइट हाउस के अधिकारियों का कहना है कि प्रशासन भविष्य में “अधिक उपयुक्त या पूर्व-वार्ता आधारित” दरों को लागू करने के रास्ते तलाशता रहेगा।

 

यह देखना दिलचस्प होगा कि इस फैसले का वैश्विक मानवाधिकारों और विकासशील देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर क्या असर पड़ता है, क्योंकि टैरिफ बढ़ने से अक्सर आम उपभोक्ता के लिए वस्तुओं की कीमतें बढ़ जाती हैं।

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